GSP खत्म होने से अमेरिका को घट सकता है जेवरात का निर्यात

अमेरिका के जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस (GSP) वापस लेने के पहले राउंड में भारत से लगभग 8.65 करोड़ डॉलर के जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट पर असर पड़ेगा। जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के एक सीनियर एग्जिक्यूटिव ने बताया, ‘भारत से 45 जेम एंड ज्वैलरी प्रॉडक्ट्स पर GSP बेनेफिट अमेरिका वापस लेगा। इसका देश के जेम एंड ज्वैलरी के एक्सपोर्ट पर बड़ा असर पड़ेगा।’

जिन आइटम्स पर GSP वापस लिया जा रहा है उनमें प्रेशियस स्टोन्स (डायमंड के अलावा) और सेमी-प्रेशियस स्टोन्स, सिल्वर अनरॉट (बुलियन और डोर के अलावा), गोल्ड (प्लेटिनम की प्लेटिंग वाले गोल्ड सहित) शामिल हैं।

भारतीय जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट को पहले ही अमेरिका के 2007, 2008 और 2009 में GSP बेनेफिट वापस लेने से नुकसान उठाना पड़ा था। इन पर अमेरिका में मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का 5-6 पर्सेंट का रेट लगना शुरू हुआ था। जिन प्रॉडक्ट्स से GSP वापस लिया गया था, उनमें सिल्वर ज्वैलरी, गोल्ड रोप नेकलेस और नेक चेन शामिल थीं।

GJEPC का अनुमान है कि इन प्रॉडक्ट्स का 2007 में अमेरिका को भारत से एक्सपोर्ट 2007 में 2.32 अरब डॉलर से 23.2 पर्सेंट गिरकर 2018 में 1.78 अरब डॉलर रह गया था। भारत ने 2018 में अमेरिका को 12.22 अरब डॉलर के जेम और ज्वैलरी का एक्सपोर्ट किया था।

GJEPC के चेयरमैन कोलिन शाह ने बताया कि GSP के अलावा भारत में दूसरी चुनौतियों के कारण जेम एंड ज्वैलरी ट्रेड नहीं बढ़ रहा। इनमें इंटरेस्ट कॉस्ट और ईज ऑफ डुइंग बिजनेस शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका में भारतीय जेम एंड ज्वैलरी की काफी मांग है। चीन के साथ ट्रेड वॉर के बाद इसमें और बढ़ोतरी हुई है।’ GSP का असर कम करने के लिए GJEPC ने सरकार से मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम (MEIS) के तहत अमेरिका को प्रमुख जेम एंड ज्वैलरी आइटम्स के एक्सपोर्ट के लिए 4 पर्सेंट का बेनेफिट देने को कहा है। शाह के अनुसार, ‘GSP को वापस लेने से अमेरिका को भारतीय जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट की प्रतिस्पर्धा की क्षमता कमजोर होगी। MEIS के तहत चार पर्सेंट का फायदा मिलने से एक्सपोर्टर्स को नुकसान कम करने में मदद मिलेगी।’ मई में जेम एंड ज्वैलरी का कुल एक्सपोर्ट 12.85 पर्सेंट घटकर 317.49 करोड़ डॉलर रहा।

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