15 जनवरी से अनिवार्य होगी सोने की हॉलमार्किंग

मुंबई: 15 जनवरी से देश में सोने की हॉलमार्किंग अनिवार्य होगी. उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने शुक्रवार को इसका एलान किया. मंत्रालय अगले साल 15 जनवरी तक इस बारे में अधिसूचना जारी कर देगा. हालांकि, सूत्रों का कहना है कि सरकार सर्राफा कारोबारियों को पुराना स्टॉक निकलने के लिए कुछ समय दे सकती है

सूत्रों का कहना है कि बीआईएस ने तीन श्रेणियों 14 कैरट, 18 कैरट और 22 कैरट के लिए हॉलमार्क के मानक तय किये हैं. अभी हॉलमार्क स्वैच्छिक है. हॉलमार्क सोने की शुद्धता का मानक है.

हॉलमार्किंग से जुड़ा प्रशासनिक नियंत्रण बीआईएस के पास है, जो उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के तहत आता है. हॉलमार्किंग अनिवार्य होने से ग्राहकों का भी भरोसा बढ़ेगा. फिलहाल इस तरह की खबरें सुनने में आती हैं कि ज्वेलर्स ज्यादा कैरेट बताकर कम कैरेट वाला सोना ग्राहकों को बेच रहे हैं. हॉलमार्किंग लागू होने के बाद ऐसा करना पाना संभव नहीं होगा.

अभी 14, 16 और 22 कैरेट के गोल्ड आभूषण पर हॉलमार्किंग जरूरी है. कैरेट वह मानक है जिसे सोने में मिश्रित धातुओं (जिंक, निकेल आदि) की मात्रा का पता चलता है. एक अनुमान के मुताबिक, देश के करीब 3 लाख ज्वेलर्स में से केवल 10 फीसदी के पास ही हॉलमार्किंग का लाइसेंस है.

क्या है हॉलमार्किंग ?
बीआईएस का हॉलमार्क सोने के साथ चांदी की शुद्धता को प्रमाणित करने का माध्यम है. बीआईएस का यह चिह्न प्रमाणित करता है कि गहना भारतीय मानक ब्यूरो के स्टैंडर्ड पर खरा उतरता है. इसलिए, सोने खरीदने से पहले सुनिश्चित करें कि आभूषणों में बीआईएस हॉलमार्क है. यदि सोने के गहनों पर हॉलमार्क है तो इसका मतलब है कि उसकी शुद्धता प्रमाणित है. कई ज्वैलर्स बिना जांच प्रकिया पूरी किए ही हॉलमार्क लगाते हैं.

ऐसे में यह देखना जरूरी है कि हॉलमार्क ओरिजनल है या नहीं. असली हॉलमार्क पर भारतीय मानक ब्यूरो का तिकोना निशान होता है. उस पर हॉलमार्किंग सेंटर के लोगो के साथ सोने की शुद्धता भी लिखी होती है. उसी में ज्वैलरी निर्माण का वर्ष और उत्पादक का लोगो भी होता है.

अगर आपको संदेह है तो आप पास के किसी हॉलमार्किंग सेंटर में जाकर ज्वेलरी की जांच करवा लें. देश भर में करीब 700 हॉलमार्किंग सेंटर हैं इनकी लिस्ट आप bis.org.in पर जाकर देख सकते हैं.

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