वैश्विक मंदी का खतरा, 20 डॉलर तक लुढ़क सकता है कच्चा तेल: राउल पैल

कई आर्थिक आंकड़ें वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किल हालात के संकेत दे रहे हैं. कई देशों की ग्रोथ में गिरावट देखने को मिल रही है. यह मंदी आने का संकेत है. रियल विजन ग्रुप के सीईओ राउल पैल ने ईटी नाउ को दिए इंटरव्यू में ये बातें कहीं. पेश हैं इस इंटरव्यू के खास अंश:

मेरा काम अनुमान लगाना है. मैं किसी बात की गारंटी नहीं दे सकता. कई चीजों को देखकर मुझे लग रहा है कि आने वाला वक्त काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है. पहले अमेरिका और वैश्विक आर्थिक ग्रोथ की बात करते हैं. आज चारों ओर आर्थिक ग्रोथ घट रही है. कई देश पहले ही मंदी में जा चुके हैं. अमेरिका भी मंदी की तरफ बढ़ता दिख रहा है. मेरा मानना है कि फेडरल रिजर्व ने एक साल पहले ब्याज दरों में जो कटौती शुरू की थी, उसकी वजह से अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ रही है.

इसके साथ अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर के चलते चीन के आर्थिक सुस्ती में फंसने से वैश्विक अर्थव्यवस्था की परेशानियां और बढ़ गई हैं. भारत की आर्थिक ग्रोथ में भी हम गिरावट देख चुके हैं. अब सवाल यह है कि क्या हालात और मुश्किल और पेचीदा हो सकते हैं? मुझे इसकी आशंका दिख रही है. बॉन्ड मार्केट से इसके संकेत दिख रहे हैं. यूरोप और खासतौर पर अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में तेजी से गिरावट आ रही है. यह मंदी के आने का संकेत है.

मुझे कुछ समय से इसके संकेत दिख रहे हैं. मार्च 2018 में चीन की आर्थिक ग्रोथ में अचानक बड़ी गिरावट आई थी. उसके बाद अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध शुरू हुआ. फिर अमेरिका में सुस्ती आने लगी. इधर, बॉन्ड बाजार में नाटकीय ढंग से गिरावट शुरू हुई है. हम इस साइकल के अगले हिस्से यानी ब्याज दरों में कटौती के दौर में पहुंच गए हैं.

अमेरिका में अभी तक ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती हुई है. लेकिन बॉन्ड मार्केट इसमें कहीं अधिक कटौती का अंदाजा लगा रहा है. मुझे लग रहा है कि फेडरल रिजर्व हालात की गंभीरता को नहीं समझ रहा है. बॉन्ड मार्केट अंडरपरफॉर्म कर सकता है. अगर ऐसा होता है तो डॉलर और बॉन्ड बाजार प्रभावित होंगे. मुझे वैश्विक मंदी आती हुई दिख रही है और ऐसे फैक्टर्स नहीं दिख रहे, जो इसे रोक सकें.
दुनियाभर में पूंजीगत खर्च में गिरावट आ रही है. जर्मनी मंदी में है और चीन में आर्थिक सुस्ती आ चुकी है. मैन्युफैक्चरिंग और वैश्विक कारोबार में हर जगह गिरावट दिख रही है. हर बड़े देश के निर्यात में गिरावट आ रही है. कई ऐसे संकेतक हैं, जो आने वाले वक्त के चुनौतीपूर्ण होने का इशारा कर रहे हैं.

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