लॉकडाउन का अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ेगा क्या असर?

भारत में कोरोना वायरस के मामले बढ़ रहे हैं. इसका संक्रमण रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे भारत में 21 दिनों के लॉकडाउन का एलान किया है. इससे देश में आर्थिक गतिविधियों पर ब्रेक लग गया है.

विश्लेषकों का मानना है कि सरकार को इस महामारी को हराने के लिए कुछ और कदम भी उठाने चाहिए. कोरोना के चलते बेरोजगारी, बैलेंस शीटों में कमजोरी, कम पूंजीगत खर्च और कंज्यूमर मांग में गिरावट आने के आसार हैं.

कोरोना के चलते पहले ही शेयर बाजार से 52 लाख करोड़ रुपये की दौलत स्वाहा हो चुकी है. बेंचमार्क सूचकाकं बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 इंडेक्स अपने शिखर स्तर से 35 फीसदी नीचे आ गए हैं, जबकि कई शेयर कई साल पहले के भावों पर मिल रहे हैं.

जनवरी में कोरोना वायरस काफी तेजी से चीन में फैला. इस दौरान भारतीय कंपनियों को सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों से दो-चार होना पड़ा. भारत आयात के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर करता है. ऑटो और फार्मा को काफी झटका लगा था. अब भारत में स्थिति लॉकडाउन तक पहुंच गई है.

अभी तक कई कंपनियों ने अपनी उत्पादन इकाइयां बंद करने का आदेश दिया है. इसमें इंडिया सीमेंट्स, भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स (भेल), मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा , हीरो मोटोकॉर्प, एम्टेक ऑटो और कैस्ट्रॉल इंडिया शामिल हैं.

एफएमसीजी कंपनियों में हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी और डाबर इंडिया गैर-जरूरी चीजों का उत्पादन करने वाली इकाइयों को बंद कर दिया है. वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनले ने भारतीय कंपनियों की कमाई के अनुमान को घटा दिया है.

नोमुरा इंडिया ने चेतावनी देते हुए कहा है, “तीसरे चरण में कोरोना के पहुंचने से कंपनियों के नेट प्रॉफिट पर असर पड़ेगा. कमजोर कंपनियों के नकद प्रवाह पर काफी बुरा असर पड़ने वाला है. कर्मचारियों की सैलरी कम की जा सकती है. इससे कॉर्पोरेट्स का पूंजीगत खर्च कम होगा और मांग में गिरावट आएगी.”

मॉर्गन स्टेनले ने कहा, “हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान बीएसई सेंसेक्स की ईपीएस ग्रोथ 10 फीसदी रहेगी, जो पहले 20 फीसदी रहने का अनुमान था.” फिलिप कैपिटल का मानना है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए एक बड़े पैकेज की जरूरत होगी.

बार्कलेज का मानना है कि इस शटडाउन ने भारत को $120 अरब यानी जीडीपी के 4 फीसदी तक झटका लग सकता है. नए अनुमानों के अनुसार, यह असर अतिरिक्त $90 अरब तक बढ़ सकता है. महाराष्ट्र पर सबसे अधिक मार पड़ रही है. भारत के जीडीपी में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 14 फीसदी है.

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