दिसंबर में बढ़ सकती हैं स्टील की कीमतें

कोलकाता: देश में स्टील का दाम दिसंबर तक 1000 से 1500 रुपये प्रति टन तक बढ़ सकता है. यह पिछले 6 महीने में पहली बढ़ोतरी होगी. इंडस्ट्री के अधिकारियों के अनुसार, विदेश में स्टील का दाम चढ़ने के अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर और हाउसिंग सेक्टरों से मांग बढ़ने के कारण स्टील की कीमतें चढ़ सकती हैं.

स्टील की एक बड़ी कंपनी के शीर्ष स्तर के मार्केटिंग अधिकारी ने बताया कि हमें नवंबर से मांग बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं. हम बढ़ती डिमांड के मुताबिक दाम तय करना चाहेंगे. देश की दूसरी स्टील कंपनियों के अधिकारियों का भी ऐसा ही कहना है.

अक्टूबर-मार्च की अवधि आमतौर पर स्टील इंडस्ट्री के लिए दो मजबूत तिमाहियां लेकर आती है. मानसून के बाद कंस्ट्रक्शन से जुड़ी गतिविधियां बढ़ती हैं. स्टील के दाम बढ़ने से टाटा स्टील, टाटा स्टील बीएसएल, जेएसडब्ल्यू स्टील, एस्सार स्टील, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया और जेएसपीएल जैसी मझोली और बड़ी स्टील कंपनियों को फायदा हो सकता हैं.

अधिकारी ने बताया कि इस साल सीजनल डिमांड के अलावा अंतर्राष्ट्रीय दाम में 40 डॉलर प्रति टन तक बढ़त होने से इसकी कीमतों में सुधार हुआ है. कमजोर एक्सचेंज रेट से घरेलू कीमत में अधिक बढ़ोतरी होती है. हालांकि, दाम को सही स्तर पर आने में अभी समय लगेगा, क्योंकि मांग अभी तेज गति से नहीं बढ़ पा रही है. इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन और ऑटोमोबाइल सेक्टर की सुस्त मांग के चलते पिछले 6 महीने से स्टील की कीमतों में गिरावट आई थी.

ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल और कंस्ट्रक्शन के सामान बनाने में इस्तेमाल होने वाले हॉट रोल्ड क्वाइल (HRC) जैसे फ्लैट स्टील के दाम इसकी वैश्विक कीमतों से तय होता है. उद्योग के अधिकारियों ने बताया कि एचआरसी की कीमत 44 हजार रुपये प्रति टन की ऊंचाई से घटकर 34 हजार रुपये प्रति टन के अस्थिर स्तर पर आ गईं. यह दाम सरकार के रेफरेंस रेट या फ्लोर प्राइस 489 डॉलर प्रति टन से कम है. इस रेट से नीचे जाने पर आयात की अनुमति नहीं मिलती है.

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