जानिए कंपनियां क्यों बढ़ा सकती हैं स्टील के भाव

मुंबई: घर बनाना महंगा हो सकता है. दरअसल, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए स्टील कंपनियां स्टील के दाम बढ़ाने के लिए बाध्य हो सकती हैं. कच्चे माल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाने से कंपनियों के लिए मौजूदा मार्जिन पर उत्पादन करना मुमकिन नहीं रह गया है. हालांकि, कमोजर मांग को देखते हुए कंपनियों के लिए दाम बढ़ाना भी चुनौती हो सकती है.

कंपनियों ने जून की शुरुआत में हाजिर में फ्लैट और लॉन्ग उत्पाद (सरिया वगैरह) के दाम 500 से 700 प्रति टन बढ़ा दिए थे. ऐसे में कंपनियां मार्जिन बढ़ाने के लिए दोबारा कीमतें बढ़ाने से पहले बाजार का रुख भांपना चाहती हैं. इस साल अब तक आयरन ओर (लौह अयस्क) के दाम 50 फीसदी से अधिक बढ़ चुके हैं.

आयरन ओर का दाम $110 प्रति टन पर पहुंच गया है, जबकि स्टील बनाने में रॉ मैटीरियल की तरह यूज होने वाला आयातित कोकिंग कोल भी महंगा होकर $200 प्रति टन हो गया है. दोनों रॉ मैटीरियल के दाम बढ़ने से स्टील कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ा है. इधर, स्टील की मांग न घटी है. इसके अलावा हर महीने 5 लाख टन से ज्यादा स्टील का आयात भी घरेलू कंपनियों की बिक्री में सेंध लगा रहा है.

जेएसडब्ल्यू स्टील के डायरेक्टर (कमर्शियल एंड मार्केटिंग) जयंत आचार्य ने कहा, ‘हमने कुछ उत्पादों के दाम बढ़ाए हैं. हम देख रहे हैं कि देशभर में इसका क्या असर हो रहा है. हम अपना मार्जिन थोड़ा बढ़ाने की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं.’ हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इन उत्पादों के दाम अप्रैल और मई में घटे थे. लेकिन अब लागत बढ़ रही है, इसलिए उसकी भरपाई करने की कोशिश की जा रही है. मध्यम अवधि से लंबी अवधि में भारतीय स्टील सेक्टर का प्रदर्शन दूसरे बाजार से बेहतर रह सकता है. इस समय दुनिया भर की अर्थव्यवस्था कमजोर मांग और वित्तीय जोखिम से जूझ रही है.
एक दिग्गज स्टील कंपनी के सीनियर अफसर ने बताया कि स्टील का दाम 1,000 प्रति टन तक बढ़ाने पर विचार हो रहा है. लेकिन बाजार से कड़ा प्रतिरोध हो रहा है. फिलहाल हॉट रोल्ड क्ववाइल का दाम लगभग 41,000-42,000 चल रहा है. इन्वेस्टेक इंडिया के लीड एनालिस्ट (मैटीरियल्स) रितेश शाह ने कहा, ‘चीन की स्टील मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने दाम घटाए हैं. डॉलर के मुकाबले युआन के दाम में कमी आई है. इसलिए स्टील पर दबाव बन सकता है.

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